गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त 2026: Best Griha Pravesh Muhurat Dates 2026 (महीनेवार पूरी लिस्ट)

10 February 2026
muhurat
By Shresa.in
गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त 2026: Best Griha Pravesh Muhurat Dates 2026 (महीनेवार पूरी लिस्ट)

नये घर में जाने से पहले देख लें 2026 के गृह प्रवेश मुहूर्त की ये लिस्ट, कहीं चूक न जाए सबसे शुभ दिन!

गृह प्रवेश एक ऐसा अवसर है जो न केवल एक नए घर में कदम रखने का प्रतीक है, बल्कि यह परिवार की खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के नए अध्याय की शुरुआत है। भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को 'मुहूर्त' के अनुसार करना अनिवार्य माना गया है।

गृह प्रवेश मुहूर्त 2026: नए घर में सुख-शांति का प्रवेश

जब हम एक नया घर बनाते हैं या खरीदते हैं, तो उसमें केवल ईंट और पत्थर नहीं होते, बल्कि हमारे सपने होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मांड की ऊर्जा का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सही मुहूर्त में गृह प्रवेश करने से घर के दोष शांत होते हैं और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गृह प्रवेश के प्रकार

शास्त्रों में गृह प्रवेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. अपूर्व गृह प्रवेश: जब आप पहली बार अपने नए बने हुए घर में प्रवेश करते हैं।

  2. सपूर्व गृह प्रवेश: यदि आप किसी कारणवश घर को खाली छोड़कर बाहर गए थे और अब दोबारा रहने आ रहे हैं।

  3. द्वान्धव गृह प्रवेश: जब किसी आपदा या परेशानी के कारण घर छोड़ना पड़ा हो और मरम्मत के बाद आप फिर से प्रवेश कर रहे हों।

2026 में गृह प्रवेश के लिए शुभ महीने और तिथियाँ

यह सूचियाँ ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के आधार पर तैयार की गई हैं ताकि आपके घर में सदैव सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त फरवरी 2026

फरवरी का महीना बसंत ऋतु के आगमन का समय होता है, जो नए कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
19 फरवरी 2026गुरुवारउत्तरा भाद्रपदतृतीयारात 8:53 से अगले दिन सुबह 6:54 तक
20 फरवरी 2026शुक्रवारउत्तरा भाद्रपदतृतीयासुबह 6:54 से दोपहर 2:37 तक
21 फरवरी 2026शनिवाररेवतीपंचमीदोपहर 1:01 बजे से शाम 7:06 बजे तक
26 फरवरी 2026गुरुवारमृगशिरादशमीसुबह 6:48 से दोपहर 12:10 तक

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त मार्च 2026

होली के इस महीने में कई शुभ योग बन रहे हैं, जो नए घर के लिए श्रेष्ठ हैं।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
4 मार्च 2026बुधवारउत्तरा फाल्गुनीप्रतिपदा/द्वितियासुबह 7:38 से अगले दिन सुबह 6:41 तक
5 मार्च 2026गुरुवारउत्तरा फाल्गुनीद्वितीयसुबह 6:41 से 8:16 तक
6 मार्च 2026शुक्रवारचित्रातृतीयासुबह 9:28 से शाम 5:52 तक
9 मार्च 2026सोमवारअनुराधासप्तमीरात 11:28 से अगले दिन सुबह 6:36 तक
13 मार्च 2026शुक्रवारउत्तरा आषाढ़ादशमीसुबह 3:04 से अगले दिन सुबह 6:33 तक
14 मार्च 2026शनिवारउत्तरा आषाढ़ादशमी/एकादशीसुबह 6:33 से अगले दिन सुबह 4:48 तक

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त अप्रैल 2026

अप्रैल में खरमास की समाप्ति के बाद चैत्र नवरात्रि का पावन समय शुरू होता है।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
20 अप्रैल 2026सोमवाररोहिणीतृतीयासुबह 5:53 से 7:28 तक

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त मई 2026

मई के महीने में अक्षय तृतीया जैसे अबूझ मुहूर्त भी आते हैं, जो अत्यंत कल्याणकारी होते हैं।

तिथिदिननक्षत्रतिथि / पक्षशुभ समय
04 मई 2026सोमवारअनुराधातृतीयासुबह 05:57 से 09:56 तक
08 मई 2026शुक्रवारउत्तरा आषाढ़ासप्तमीदोपहर 12:22 से रात 09:19 तक
13 मई 2026बुधवारउत्तरा भाद्रपदएकादशीसुबह 05:33 से दोपहर 01:28 तक

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त जून 2026

गर्मी की छुट्टियों के इस मौसम में परिवार के साथ गृह प्रवेश करना एक अच्छा विचार हो सकता है।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
24 जून 2026बुधवारचित्रादशमीसुबह 5:45 से दोपहर 1:58 तक
26 जून 2026शुक्रवारअनुराधात्रयोदाशीरात 10:23 से अगले दिन सुबह 5:26 तक
27 जून 2026शनिवारअनुराधात्रयोदाशीसुबह 5:26 से रात 10:10 तक

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त जुलाई 2026

जुलाई के पहले सप्ताह में गृह प्रवेश के अच्छे योग हैं, इसके बाद देवशयनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्य रुक जाते हैं।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
01 जुलाई 2026बुधवारउत्तरा आषाढ़ाद्वितीयसुबह 6:52 से अगले दिन सुबह 5:26 तक
02 जुलाई 2026गुरुवारउत्तरा आषाढ़ाद्वितीयअगले दिन सुबह 5:28 से 9:26 तक
06 जुलाई 2026सोमवारउत्तरा भाद्रपदसप्तमीशाम 4:07 से अगले दिन सुबह 5:29 तक

गृह प्रवेश शुभ मुहूर्त: अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2026

इन तीन महीनों में गृह प्रवेश के लिए कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।

इसका कारण क्या है?

ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से इस समय को 'चातुर्मास' और 'शून्य मास' कहा जाता है:

  1. धार्मिक कारण: देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान मांगलिक कार्य जैसे विवाह और गृह प्रवेश वर्जित होते हैं। साथ ही, भाद्रपद मास में पितृपक्ष (श्राद्ध) का समय आता है, जिसमें नई शुरुआत नहीं की जाती।

  2. वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण: यह समय भारत में भारी वर्षा (Monsoon) का होता है। अत्यधिक नमी और बारिश के कारण निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री (जैसे लकड़ी का काम या पेंट) पूरी तरह से सेट नहीं हो पाती। नमी के कारण वास्तु में 'नकारात्मक ऊर्जा' या सीलन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे गृह प्रवेश के समय स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त नवंबर 2026

दीपावली के बाद देव प्रबोधिनी एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्यों की धूम मच जाती है।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
11 नवंबर 2026बुधवारअनुराधाद्वितीयसुबह 6:41 से 11:37 तक
14 नवंबर 2026शनिवारउत्तरा आषाढ़ापंचमीसुबह 8:25 से 11:22 बजे तक
20 नवंबर 2026शुक्रवारउत्तरा भाद्रपदएकादशीसुबह 6:57 से अगले दिन सुबह 6:30 तक
21 नवंबर 2026शनिवाररेवतीत्रयोदशी/द्वादशीसुबह 4:58 से अगले दिन सुबह 5:53 तक
25 नवंबर 2026बुधवाररोहिणी/मृगशिराप्रतिपदा/द्वितियासुबह 6:53 से अगले दिन सुबह 6:51 तक
26 नवंबर 2026गुरुवारमृगशिराद्वितीया/तृतीयासुबह 6:51 से शाम 5:46 तक

गृह प्रवेश करने का शुभ मुहूर्त दिसंबर 2026

साल का अंतिम महीना आपके नए घर के सपने को पूरा करने के लिए कई अवसर प्रदान करता है।

तिथिदिननक्षत्रतिथि (पक्ष)शुभ समय
2 दिसंबर 2026बुधवारउत्तरा फाल्गुनीदशमीरात 10:52 से अगले दिन सुबह 6:59 तक
3 दिसंबर 2026गुरुवारउत्तरा फाल्गुनीदशमीसुबह 6:59 से 9:22 तक
4 दिसंबर 2026शुक्रवारचित्राएकादशीसुबह 10:23 से रात 11:43 तक
11 दिसंबर 2026शुक्रवारउत्तरा आषाढ़ातृतीयासुबह 3:05 बजे से अगले दिन सुबह 7:05 बजे तक
12 दिसंबर 2026शनिवारउत्तरा आषाढ़ातृतीयासुबह 7:05 से दोपहर 2:07 तक
18 दिसंबर 2026शुक्रवाररेवतीदशमीसुबह 11:15 बजे से अगले दिन सुबह 7:10 बजे तक
19 दिसंबर 2026शनिवाररेवतीदशमीसुबह 7:10 से सुबह 3:57 तक
30 दिसंबर 2026बुधवारउत्तरा फाल्गुनीसप्तमीसुबह 7:14 से दोपहर 12:35 तक

मुहूर्त का चयन करते समय ध्यान दें:

  • पंचांग भिन्नता: आपके क्षेत्र के स्थानीय सूर्योदय समय के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

  • कुंडली मिलान: परिवार के मुखिया की राशि के अनुसार भद्रा, राहुकाल और पंचक का विचार अवश्य करें।

  • वास्तु शांति: गृह प्रवेश से पहले वास्तु शांति पूजन करवाना घर की नकारात्मकता को दूर करने के लिए अनिवार्य है।

नोट: सटीक मुहूर्त के लिए अपनी जन्म कुंडली और स्थानीय पंचांग के अनुसार पंडित जी से परामर्श अवश्य लें।

गृह प्रवेश के लिए वास्तु के सुनहरे नियम

एक आदर्श गृह प्रवेश केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वास्तु की शुद्धता भी शामिल है।

1. मुख्य द्वार की सजावट

घर का मुख्य द्वार 'सिंह द्वार' कहलाता है। यहीं से सकारात्मकता प्रवेश करती है।

  • द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं।

  • हल्दी और कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।

  • द्वार पर लक्ष्मी जी के पद-चिन्ह बनाना अत्यंत शुभ होता है।

2. कलश स्थापना का महत्व

गृह प्रवेश के समय मंगल कलश का बहुत महत्व है। कलश में शुद्ध जल, अक्षत, सिक्का, दूर्वा और सुपारी डालें। ऊपर से नारियल रखकर उसे लाल कपड़े से लपेटें।

3. सूर्य की रोशनी और वेंटिलेशन

सुनिश्चित करें कि प्रवेश के समय घर में पर्याप्त रोशनी हो। अंधकारमय घर में नकारात्मकता का वास होता है।

गृह प्रवेश पूजा विधि

यदि आप स्वयं पूजा का प्रबंधन कर रहे हैं, तो इन चरणों का पालन करें:

  1. गणेश पूजन: सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करें।

  2. शंख ध्वनि: घर में प्रवेश करते समय शंख बजाना चाहिए, इससे वातावरण की अशुद्धियां दूर होती हैं।

  3. दाहिना पैर पहले: पुरुष और महिला को हमेशा दाहिना पैर पहले घर के अंदर रखना चाहिए।

  4. रसोई की पूजा: गृह प्रवेश के दिन रसोई में सबसे पहले दूध उबालना चाहिए। दूध का उफान आना घर में समृद्धि के उफान का प्रतीक है।

  5. गौ पूजा: यदि संभव हो, तो प्रवेश से पहले गाय की पूजा करना और उसे ग्रास देना अत्यंत पुण्यकारी है।

गृह प्रवेश के दौरान क्या न करें 

  • अधूरा घर: जब तक घर की छत न बन जाए और दरवाजे-खिड़कियां न लग जाएं, तब तक गृह प्रवेश न करें।

  • सूतक काल: यदि परिवार में किसी की मृत्यु हुई हो या जन्म (सूतक/पातक), तो गृह प्रवेश टाल दें।

  • मंगलवार का त्याग: आमतौर पर गृह प्रवेश के लिए मंगलवार को वर्जित माना जाता है (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर)।

  • खाली घर न छोड़ें: पूजा के बाद घर को कम से कम 3 रात तक खाली नहीं छोड़ना चाहिए। वहां दीपक जलाए रखें।

गृह प्रवेश के लिए सामग्री सूची

पूजा को निर्बाध बनाने के लिए इन चीजों को पहले से तैयार रखें:

  • कलश, नारियल, आम के पत्ते।

  • गंगाजल, अक्षत, धूप-अगरबत्ती।

  • मिठाई, फल और फूल।

  • हवन सामग्री और लकड़ियां।

  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी)।

गृह प्रवेश से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

1. क्या गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त का पालन करना वाकई जरूरी है?

जी हाँ, हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मांड की ऊर्जा हर समय बदलती रहती है। शुभ मुहूर्त में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अनुकूल होती है, जिससे घर में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि का वास होता है। बिना मुहूर्त के प्रवेश करने से वास्तु दोष और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।

2. अगर घर का काम थोड़ा बाकी हो, तो क्या गृह प्रवेश किया जा सकता है?

शास्त्रों के अनुसार, गृह प्रवेश तभी करना चाहिए जब घर का मुख्य द्वार (Main Door) पूरी तरह तैयार हो, छत डल चुकी हो और रसोई का काम पूरा हो गया हो। अधूरे घर में प्रवेश करना शुभ नहीं माना जाता है क्योंकि घर की 'सुरक्षा' और 'पूर्णता' वास्तु के मुख्य अंग हैं।

3. किराए के घर में शिफ्ट होते समय क्या पूजा करनी चाहिए?

बिल्कुल। भले ही घर आपका न हो, लेकिन आप वहां निवास करने जा रहे हैं। किराए के घर में शांति और बरकत के लिए आप 'वास्तु शांति' या छोटा सा 'गणेश पूजन' कर सकते हैं। इससे पुराने निवासियों की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।

4. क्या रात के समय गृह प्रवेश करना शुभ होता है?

सामान्यतः गृह प्रवेश के लिए सूर्योदय से लेकर दोपहर तक का समय सबसे उत्तम माना जाता है। सूर्यास्त के बाद नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होने लगती हैं, इसलिए रात में गृह प्रवेश की सलाह नहीं दी जाती। हालांकि, विशेष नक्षत्रों में यदि मध्यरात्रि का मुहूर्त निकले, तो विद्वान पंडित की सलाह पर ही कदम उठाएं।

5. गृह प्रवेश के दिन सबसे पहले क्या खाना पकाना चाहिए?

परंपरा के अनुसार, गृह प्रवेश के दिन रसोई घर में सबसे पहले दूध उबालना चाहिए। दूध का उबलकर गिरना समृद्धि का प्रतीक है। इसके बाद उस दूध से खीर या हलवा बनाकर भगवान को भोग लगाना चाहिए और प्रसाद के रूप में बांटना चाहिए।

6. क्या मंगलवार या शनिवार को गृह प्रवेश कर सकते हैं?

ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार को गृह प्रवेश के लिए वर्जित माना गया है क्योंकि यह 'क्रूर वार' की श्रेणी में आता है और अग्नि तत्व की प्रधानता होती है। शनिवार को भी कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर टाला जाता है। गुरुवार, शुक्रवार, सोमवार और बुधवार इसके लिए सर्वश्रेष्ठ दिन माने जाते हैं।

7. घर में प्रवेश करते समय कलश क्यों ले जाया जाता है?

कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। इसमें जल, सिक्का, दूर्वा और आम के पत्ते होते हैं जो वरुण देव और लक्ष्मी जी का प्रतिनिधित्व करते हैं। कलश के साथ प्रवेश करने का अर्थ है कि आप अपने घर में खुशहाली और संपन्नता को आमंत्रित कर रहे हैं।

8. क्या हम पुराने फर्नीचर के साथ नए घर में प्रवेश कर सकते हैं?

कोशिश करें कि गृह प्रवेश के दिन कुछ नया सामान या कम से कम नए बर्तन जरूर हों। पुराने फर्नीचर को आप ले जा सकते हैं, लेकिन प्रवेश के समय घर को पूरी तरह पुराने सामान से न भरें। पूजा के बाद ही सारा सामान शिफ्ट करना बेहतर होता है।

9. यदि मुहूर्त के दौरान परिवार का कोई सदस्य अस्वस्थ हो तो क्या करें?

गृह प्रवेश एक उत्सव है। यदि घर का कोई मुख्य सदस्य गंभीर बीमार है या सूतक (जन्म/मृत्यु) की स्थिति है, तो पूजा स्थगित कर देनी चाहिए। शुद्ध मन और स्वस्थ शरीर से की गई पूजा ही पूर्ण फल देती है।